
काशी के प्राचीन और जीवंत मंदिर — समय, आरती, स्थान और पहुँचने का रास्ता।
3 सूचीबद्धकाशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है — इसकी गलियों में हज़ारों मंदिर हैं, स्वर्णमयी काशी विश्वनाथ (बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक) से लेकर सदियों पुराने मोहल्ले के छोटे मंदिरों तक।
अधिकांश केवल स्मारक नहीं बल्कि नित्य पूजा के जीवंत स्थान हैं: नियत समय पर आरती होती है, पुजारी दर्शन व अभिषेक कराते हैं, और पर्व के दिनों में भारी भीड़ रहती है। नीचे दी गई सूची से हर मंदिर का समय, स्थान और पहुँचने का रास्ता देखें, और उसी दिन के दर्शन परिवर्तन के लिए मंदिर की सूचना अवश्य देखें।
कोई आधिकारिक गणना नहीं है — अनुमान हज़ारों में है, क्योंकि बड़े मंदिरों के साथ लगभग हर गली में छोटे मंदिर हैं। यहाँ सूची में प्रमुख और सत्यापित मंदिर दिए गए हैं।
मंदिर आमतौर पर तड़के मंगला आरती (लगभग 3 बजे) से रात देर (लगभग 11 बजे) तक खुला रहता है, बीच में कई आरतियाँ होती हैं। पर्व के दिनों में समय बदलता है, इसलिए जाने से पहले मंदिर की सूचना या आधिकारिक साइट पर पुष्टि कर लें।
साधारण दर्शन निःशुल्क है। बड़े मंदिरों में सुगम दर्शन, विशेष आरती या प्रायोजित अभिषेक जैसी वैकल्पिक सशुल्क सेवाएँ तेज़ या आरक्षित अनुभव के लिए बुक की जा सकती हैं।
केंद्र में काशी विश्वनाथ (ज्योतिर्लिंग) है; कई लोग संकट मोचन हनुमान, दुर्गा कुंड, बीएचयू परिसर का नया विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव भी जाते हैं। मंदिर दर्शन के साथ दशाश्वमेध घाट की संध्या गंगा आरती अवश्य देखें।
वाराणसी के अधिकांश मंदिर सभी के लिए खुले हैं। कुछ गर्भगृहों में प्रवेश केवल हिन्दुओं तक सीमित है; जहाँ ऐसा है वहाँ द्वार पर सूचना लगी होती है, और अंदर फोटोग्राफी अक्सर वर्जित रहती है — सूचनाएँ देखें।